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Ambikapur News – मैनपाट में सुअरों-भालुओं का आतंक, धान-मक्के की फसल कर रहे तबाह, नुकसान से सिर पीट रहे किसान

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Mainpat: सुअरों व भालुओं (Pigs and bears) के हर दिन उत्पात के आगे बेबस नजर आ रहे एक दर्जन गांव के किसान, मुआवजा प्रकरण भी नहीं किया जा रहा तैयार

अंबिकापुर. मैनपाट (Mainpat) के तराई क्षेत्र के निवासी प्रतिवर्ष हाथियों के उत्पात से परेशान रहते हैं। उन्हें घर-अनाज, सामान का नुकसान हाथियों के उत्पात से उठाना पड़ता है। लेकिन अब मैनपाट के कई गांवों के किसान सुअरों व भालुओं के उत्पात से परेशान हैं।

सुअरों का झुंड इन दिनों व्यापक पैमाने पर धान की खड़ी फसल (Crops) को बर्बाद कर रहा है तो वहीं भालू मक्के की तैयार फसल चट कर जा रहे हैं।

धान-मक्के की बर्बादी देख किसान सिर पीटने को मजबूर हैं, क्योंकि इस नुकसान के मुआवजा हेतु वन विभाग के मैदानी अमले की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिल पाती। सुअरों-भालुओं को रोकने का उपाय उन्हें नहीं सूझ रहा है, नतीजतन अब तक कई एकड़ धान-मक्के की फसल बर्बाद हो चुकी है।

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मैनपाट के तराई क्षेत्र हाथियों के ट्रैक बन चुके हैं, यहां हर साल हाथी आते हैं और कई घर तबाह कर देते हैं। इससे ग्रामीणों को घर, अनाज व सामान का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। हाथियों का उत्पात अब तराई क्षेत्र के लिए सामान्य घटना बन चुकी है।

इसी बीच अब मैनपाट के के कई गांवों के किसानों के लिए सुअर-भालू (Pigs and bears) बड़ी मुसीबत बन गए हैं। धान के खेतों में सुअरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि किसान बेबस हो गए हैं। प्रतिदिन सुअरों का झुंड धान की फसल को बर्बाद कर रहा है।

अब तक कई एकड़ धान की फसल सुअरों ने बर्बाद कर दी है। किसान जब खेतों में पहुंचते हैं तो चारों तरफ उन्हें फसल की बर्बादी नजर आती है, जब फसल कटाई का समय आया है तो इतना नुकसान किसानों को परेशान कर रहा है।

पुटुस की झाडिय़ों में जानवरों का डेरा
मैनपाट में इन दिनों मैदानी क्षेत्रों में पुटुस की झाडिय़ां जंगल की ही तरह उग आईं हैं। ये घनी झाडिय़ां ही सुअरों व भालुओं (Bears) का डेरा बन गईं हैं। झाडिय़ों से निकलकर सुअरों व भालुओं का झुंड सीधे खेतों में पहुंचकर धान, मक्के की फसल को बर्बाद कर रहा है। जंगलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी जानवरों के रिहायशी क्षेत्र में आने का कारण है।

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खेतों में घुस मक्का चट कर जा रहे भालू
जंगल से सटे खेतों में लगी मक्के की तैयार फसल भालुओं के निशाने पर है। रात में भालुओं का झुंड जंगल से निकलकर मक्के की खेतों में पहुंच जाता है। भालू पूरी रात मक्के की तैयार फसल आराम से चट कर जा रहे हैं।

सुबह किसानों को खेत में सिर्फ मक्के के छिलके व रेशे ही नजर आते हैं। 20 एकड़ में मक्के की फसल लगाने वाले करमा टासी ने बताया कि भालू अब तक 3 एकड़ फसल बर्बाद कर चुके हैं। उन्हें भारी नुकसान हुआ है।

इन गांवों के किसान सबसे अधिक परेशान
मैनपाट के ग्राम सरभंजा, पकरापारी, ललेया, परपटिया, केसरा, लुरेना, कुदारीडीह, सपनादर, बरिमा, सरईकिरचा, कमलेश्वरपुर, पथरई गांव के किसान सुअरों व भालुओं के उत्पात से काफी परेशान हैं। किसान रामभरोस, मोहरलाल, रामप्रसाद, नंदलाल, दिलीप ने बताया कि जानवरों से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वन अमला सिर्फ हाथियों के मूवमेंट (Elephants movements) के समय ही नजर आता है। इन जानवरों के उत्पात को रोकने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है।

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नुकसान की सुध लेने स्थानीय वन अमला सक्रिय नहीं
हाथियों द्वारा जान-माल व फसल के नुकसान पर वन विभाग सर्वे कर मुआवजा तो दे देता है, लेकिन सुअरों व भालुओं से नुकसान के मुआवजा हेतु कोई पहल नहीं की जाती है।

स्थानीय वन अमले द्वारा किसानों की सुध नहीं लिए जाने की वजह से सुअरों व भालुओं से धान-मक्के की फसल के नुकसान की मार झेल रहे किसान सिर पीटने को मजबूर हैं। सुअरों व भालुओं का आतंक बढ़ चुका है कि इन्हें रोकने का कोई उपाय किसानों को नहीं सूझ रहा है।

नुकसान का मिलेगा मुआवजा
इन वन्य प्राणियों से नुकसान के मुआवजा हेतु प्रावधान है। जिन किसानों की भी फसल को नुकसान पहुंचा है, वे स्थानीय अधिकारी-कर्मचारियों से तुरंत संपर्क करें, ताकि उनका प्रकरण तैयार किया जा सके।
पंकज कमल, डीएफओ, सरगुजा












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