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Breaking News- नवरात्र 2020: इस तरह घटस्थापना करने से घर में दस्तक देती हैं मां दुर्गा, जानिए शुभ महूर्त

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नई दिल्लीः नवरात्र आने में अब कुछ ही दिन शेष हैं. जल्द ही मां दुर्गा आपके दरबाजे पर दस्तक देने वाली हैं. नवरात्र को लेकर भक्तों में उत्साह है और इन दिनों हर कोई फेस्टिवल की तैयारियों में जुटा है. सितंबर और अक्टूबर में आने वाले नवरात्र को शरदीय नवरात्र कहा जाता है. इस साल 17 अक्टूबर से नवरात्र लगने वाली हैं जो 25 अक्टूबर तक चलेंगी. इसके बाद 26 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा सेलिब्रेट किया जाएगा. 

दुनियाभर में व्यापक रूप से मनाया जाने वाले नवरात्रि के उत्सव के 5 दिन बंगालियों खास तौर से मनाते हैं. उनके लिए नवरात्रि 5 दिन बेहद खास होते हैं. इस साल यह 22 से 26 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. नवरात्र के दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है. हर एक दिन देवी (Durga Puja 2020) के एक अलग रूप की उपासना करने से भक्त को अलग-अलग रूपों से आशीर्वाद प्राप्त करने का मौका मिलता है. यहां हम आपको नवरात्र फेस्टिव के दौरान शारदीय नवरात्रि घटस्थापना समय के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं. 

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक

अश्विनी घटस्थापना शनिवार, 17 अक्टूबर, 2020 

घटस्थापना मुहूर्त – प्रातः 06:23 से प्रातः 10:12 तक

अवधि – 03 घंटे 49 मिनट

ये भी पढ़ें- नवरात्र 2020: मां दुर्गा को खुश करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तीथि पर आता है

घटोत्पाद मुहूर्त निषिद्ध चित्र नक्षत्र के दौरान आता है. 

प्रतिपदा तीथी शुरू – 01:00 AM 17 अक्टूबर, 2020 

प्रतिपदा तीथि समाप्त – 09:08 PM 17 अक्टूबर, 2020 

चित्रा नक्षत्र शुरू – 02:58 PM 16 अक्टूबर, 2020 

चित्रा नक्षत्र समाप्त – 11:52 दोपहर 17 अक्टूबर, 2020 

जानिए कैसे करें घटस्थापना की तैयारी जिससे प्रसन्न होकर घर विराजेंगी मां
इस पूजा के लिए मिट्टी से बना चौड़े मुंह वाला एक बर्तन प्रयोग में लाया जाता है जिसमें सप्त धान्य यानी 7 तरह के बीज (सात या नौ विभिन्न अनाजों) को मिट्टी में डाला जाता है. इसकी तीन परतें बिखेर दी जाती हैं और बाद में इसमें  पानी का छिड़काव किया जाता है, ताकि बीज को पनपने और अंकुरित होने के लिए पर्याप्त नमी मिल सके. इसके बाद एक कलश (पीतल / तांबा या चांदी से बना) को स्वस्छ जल से भरा जाता है. इस कलश में सिक्के, सुपारी, अक्षत (हल्दी पाउडर के साथ कच्चे चावल) और दुर्वा घास प्रयोग में लाई जाती है. फिर आम के पेड़ के पांच पत्ते कलश के चारों ओर रख दिए जाते हैं. अंत में नारियल रखकर कलश को ढक दिया जाता है.

ये भी घटस्थापना का तरीका
जानकारी के लिए बता दें कि कुछ लोग पानी के बजाय कलश में कच्चे चावल, सिक्के, सूखे हल्दी फल और कुमकुम डालते हैं. इस कलश को मिट्टी और नवधान से भरे बर्तन के ठीक बीच में रखा जाता है. फिर कलश पर हल्दी-कुमकुम टीका लगाया जाता है. आप कलश को रंगीन कपड़े से ढक सकते हैं उसमें माला भी पहना सकते हैं. एक बार घाट तैयार हो जाने के बाद, इसे अपने पूजा कक्ष में एक लकड़ी के मंच पर रखें.  इसके बाद आप मां दुर्गा का आह्वान करें. मां को प्रसाद चढ़ाएं और आराधना करें. देवी को इस तरह विधि-विधान से बुलाने से अवश्य मां दुर्गा आपके घर दस्तक देती हैं. नवरात्रि का यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और घाटस्थापना नारी शक्ति- दुर्गा का प्रतीक है.



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