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Breaking News- सेना प्रमुख जनरल नरवणे बुधवार को तीन दिवसीय नेपाल यात्रा पर जाएंगे

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दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे बुधवार को नेपाल की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा शुरू करेंगे जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के बाद तनावपूर्ण हुए सामरिक संबंधों में पुन: सामंजस्य स्थापित करना है. सेना प्रमुख अपनी इस यात्रा में राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी और प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से मुलाकात कर सकते हैं. वह इस दौरान कई असैन्य और सैन्य नेताओं से भी बातचीत करेंगे. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि जनरल नरवणे की नेपाल यात्रा के कार्यक्रम में नेपाली सेना के मुख्यालय का भ्रमण, नेपाली सेना के स्टाफ कॉलेज में युवा सैन्य अधिकारियों को संबोधन और उनके सम्मान में नेपाली सेना प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा द्वारा आयोजित रात्रिभेज में शिरकत करना शामिल है.

इस यात्रा में जनरल नरवणे को सालों पुरानी परंपरा के तहत गुरुवार को नेपाली राष्ट्रपति द्वारा ‘नेपाली सेना के जनरल’ की मानद उपाधि प्रदान की जाएगी. 1950 में इस परंपरा की शुरुआत हुई थी. भारत भी नेपाल के सेना प्रमुख को ‘भारतीय सेना के जनरल’ की मानद उपाधि प्रदान करता है.

अधिकारियों ने कहा कि जनरल नरवणे इस समारोह के बाद राष्ट्रपति पैलेस में राष्ट्रपति भंडारी से मुलाकात करेंगे. वह शुक्रवार को प्रधानमंत्री ओली से भेंट कर सकते हैं. प्रधानमंत्री ओली से जनरल नरवणे की होने वाली मुलाकात को इस लिहाज से अहम माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच मानचित्र विवाद को पीछे छोड़ते हुए संबंधों में नये सिरे से सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है.

अधिकारियों ने कहा कि जनरल नरवणे विभिन्न मुद्दों पर जनरल थापा से भी विस्तृत बातचीत करेंगे जिनमें सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना तथा दोनों देशों के बीच करीब 1,800 किलोमीटर लंबी सीमा के प्रबंधन को मजबूत करना शामिल है. नेपाल ने मई में एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी करते हुए उत्तराखंड के अनेक क्षेत्रों को अपनी सरजमीं का हिस्सा होने का दावा किया था जिसके बाद दोनों पड़ोसी मुल्कों के रिश्तों में तनाव आ गया था. तब से दोनों देशों के बीच भारत की ओर से यह पहली उच्चस्तरीय काठमांडू यात्रा होगी.

यह जनरल नरवणे का दूसरा कूटनीतिक मिशन भी होगा. इससे पहले पिछले महीने उन्होंने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ म्यामां की बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा की थी. इस यात्रा में भारत ने म्यामां की नौसेना को हमलावर पनडुब्बियों की आपूर्ति करने का फैसला किया था तथा सैन्य और रक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई थी.

(इनपुट- एजेंसी भाषा)



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