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Breaking News- DNA ANALYSIS: मास्क से मुक्ति मिलने वाली है, बच्ची ने दिए अच्छे दिन के संकेत?

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर वायरल हुई है, जो आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी. ये वायरल तस्वीर एक नवजात बच्ची की है. 

चेहरे पर मुस्कान लाने वाली तस्वीर वायरल
इस तस्वीर में ये बच्ची अपने डॉक्टर के चेहरे से Mask हटा रही है. इस तस्वीर में जो डॉक्टर हैं उनके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान है. ये तस्वीर UAE के एक अस्पताल की है और इस डॉक्टर का नाम समीर चियाब है. डॉक्टर समीर ने खुद ये तस्वीर अपने इंस्टाग्राम पर Post की थी. लोग कह रहे हैं कि ये Picture Of The Year है क्योंकि ये तस्वीर इस बात की उम्मीद जगाती है कि जल्द ही इंसानों के चेहरे से Mask हटेगा और मुस्कुराहट से भरे चेहरे फिर से दिखाई देने लगेंगे. 

कोरोना के खिलाफ करना होगा लंबा संघर्ष
 इस तस्वीर के सहारे लोग कोरोना मुक्त दुनिया का सपना देख रहे हैं. लेकिन क्या वाकई दुनिया कोरोना वायरस से मुक्त होने के लिए ईमानदारी से कोशिश कर रही है या फिर अभी Face Mask के पीछे छिपे चेहरों की मुस्कुराहट देखने के लिए हमें लंबा इंतजार करना होगा ? जी न्यूज के पास कई ऐसी तस्वीरें आई हैं, जो ये साबित करती हैं कि कोरोना वायरस के खिलाफ अभी इंसानों को लंबा संघर्ष करना होगा. 

ब्रिटेन में लॉकडाउन से पहले हजारों लोगों ने की पार्टी
दरअसल ब्रिटेन के Liverpool इलाके में दो दिन पहले हजारों की संख्या में लोगों ने Liverpool की सड़कों पर पार्टी की. इस दौरान लोगों ने ना तो किसी ने Social Distancing का ध्यान रखा और ना ही ज्यादातर लोगों ने Face Mask लगाए हुए थे. Liverpool के सभी Clubs और Bar लोगों से भरे हुए थे और इन जगहों पर Social Distancing के नियमों की परवाह किसी को नहीं थी.

ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों में कोरोना की दूसरी लहर
ये स्थिति तब है जब शुक्रवार रात से Liverpool समेत England के आधे से ज्यादा शहरों में फिर से सख्त Lock Down लागू हो गया. लोगों को इस Lock Down का पता था. इसी लिए लोग Lock Down लागू होने से पहले सड़कों पर पार्टी करने लगे. ब्रिटेन यूरोप के उन देशों में से एक है, जहां कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू हो चुकी है. कुछ विशेषज्ञ इसे पहले से भी ज्यादा खतरनाक बता रहे हैं.

कई पश्चिमी देशों ने आंशिक या पूर्ण लॉकडाउन लागू किया
चेक रिपब्लिक, फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसे देशों में आंशिक या पूर्ण Lock Down लागू करके Corona Virus की Second Wave को रोकने की कोशिश हो रही है. दिल्ली के सदर बाजार इलाके में लोग दीवाली की खरीददारी करने के लिए पहुंच रहे हैं. यहां Liverpool की तरह पार्टी तो नहीं हो रही. लेकिन Social Distancing के नियम यहां भी पूरी तरह से गायब हैं.

 भारत में भी लोग कोरोना संक्रमण पर लापरवाह हुए
भारत के सिनेमा घर भी गुरुवार से खुल चुके हैं और लोग Social Distancing के साथ फिल्में देखने जा रहे हैं. ये वो लोग हैं जो पूरी सावधानी बरत रहे हैं, Social Distancing का पालन कर रहे हैं. जो लोग बाहर बाजारों में घूम रहे हैं उन्हें देखकर ये लोग सोचते होंगे कि अगर ये उन लोगों को संपर्क में आए तो इनका जीवन संकट में आ जाएगा. जो लोग अनुशासन का पालन कर रहे हैं उनके प्रयासों की कुछ लोग धज्जियां उड़ा रहे हैं.

कोरोना पर लापरवाही के कारण
अब सवाल ये है कि जब कोरोना वायरस का खतरा दूर नहीं हुआ है तो फिर लोग लापरवाही क्यों दिखा रहे हैं. इसके सिर्फ दो कारण हो सकते हैं. पहला ये कि लोग शायद Denial Mode में चले गए हैं. यानी लोगों ने कोरोना वायरस की मौजूदगी से ही इनकार कर दिया है और वो भूल गए हैं कि ऐसी कोई महामारी कभी आई भी थी. ऐसा भी हो सकता है कि लोग इस महामारी से थक गए हैं और तमाम खतरों के बावजूद किसी भी कीमत पर घरों से बाहर निकलना 
चाहते हैं. इस स्थिति को Pandemic Fatigue यानी महामारी से होने वाली थकावट कहा जाता है.

कहीं हम Burn Out तो नहीं हो गए
ये वो स्थिति होती है जब किसी संकट का सामना करते करते आपका मन और शरीर दोनों पूरी तरह से थक जाते हैं  यानी आप Burn Out होने लगते हैं. ये एक ऐसी स्थिति होती है जब आपके शरीर और मन में जरा भी ऊर्जा नहीं बचती. आप किसी भी कीमत पर बंधनों को तोड़ना चाहते हैं.

ज्यादा खतरे के बावजूद लोगों में डर काफी कम
जब भारत में Lockdown लगाया गया था तब इस वायरस के संक्रमण के सिर्फ 500 मामले थे. अब जब ये संख्या 1 करोड़ की तरफ बढ़ रही है तब लोग बेरपवाह होकर घरों से बाहर निकल रहे हैं. यानी जब कोरोना वायरस जरा सा था. तब डर बहुत ज्यादा था और आज जब संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा है तो डर बहुत जरा सा रह गया है.

दुनिया में 4 करोड़ कोरोना मरीज
पूरी दुनिया की बात करें तो विश्व में कोरोना वायरस के मरीज़ों की संख्या 4 करोड़ के करीब पहुंच गई है. इनमें से 10 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं . भारत में संक्रमित लोगों की संख्या 70 लाख से ज्यादा है. इनमें से 1 लाख 12 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में संक्रमण के नए मामलों में कमी आई है. लेकिन अभी  ये महामारी अपने अंत से बहुत दूर है.

अनुशासन के टेस्ट में फेल हुए दुनिया के लोग
शायद लोग अब Covid 19 के साथ सहज हो गए हैं. लोगों ने इसकी सच्चाई को स्वीकार कर लिया है और मान लिया है कि कोरोना वायरस का संक्रमण तो एक दिन होना ही है. Covid 19 अपने साथ अनुशासन लेकर आया था. लेकिन अनुशासन के इस टेस्ट में लोग सात-आठ महीनों में ही फेल हो गए. लोग सावधानी बरतने के बजाय ऐसी दवाएं खाने के लिए तैयार हैं, जो उन्हें इस वायरस से बचाने का भरोसा दिलाती हैं.

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