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Breaking News- Skin Cancer के इलाज में भारतीय वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी

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नई दिल्ली:  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के शोधकर्ताओं ने स्किन कैंसर का इलाज (Skin Cancer Treatment) करने के लिए चुंबकीय नैनोफाइबर वाली ‘नॉन-इनवेस्टिव बैंडेज’ (Non- invasive bandage) विकसित की है. यह ट्यूमर सेल्स (Tumour cells) में गर्मी नियंत्रित करेगी. स्किन कैंसर का प्रमुख (Skin Cancer Main Cause) कारण सूर्य से पराबैंगनी किरणों का अत्यधिक संपर्क होता है.

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आईआईएससी के मुताबिक स्किन कैंसर (Type of Skin Cancer) मुख्य तौर पर दो प्रकार का होता हैं. एक मेलानोमा, जो कोशिकाओं में Melanocytes से विकसित होता है दूसरा गैर-मेलेनोमा जो अन्य त्वचा कोशिकाओं से विकसित होता है. आईआईएससी ने बताया है कि गैर-मेलेनोमा स्किन कैंसर से अधिक लोग पीड़ित हैं लेकिन मेलेनोमा ज्यादा घातक है इससे मरने वालों की संख्या भी अधिक है.

स्किन कैंसर के सामान्य उपचारों (Common treatments for skin cancer) में सर्जरी (Surgery), रेडिएशन थेरेपी (radiation therapy) और कीमोथेरेपी (chemotherapy) शामिल हैं लेकिन इन उपचारों और अन्य पारंपरिक उपचारों की अपनी सीमाएं हैं. स्किन कैंसर के इलाज (skin cancer treatment) के लिए एक आशाजनक विकल्प हाइपरथर्मिया (Hyperthermia) है. हाल के वर्षों से शोधकर्ता ट्यूमर के ऊतकों (tumour tissues) को गर्मी पहुंचाने के तरीकों को विकसित करने पर काम कर रहे थे ताकि कैंसर कोशिकाओं को प्रभावी तरीके से टारगेट किया जा सके. ऐसी ही एक तकनीक को मैग्नेटिक हाइपरथर्मिया (magnetic hyperthermia) कहा जाता है, जिसमें एएमएफ का उपयोग करके ट्यूमर को गर्म करने के लिए चुंबकीय नैनोकणों (magnetic nanoparticles) का उपयोग किया जाता है.

अब आईआईएससी में सेंटर फॉर बायोसिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (बीएसएसई) और आणविक प्रजनन, विकास और आनुवंशिकी (एमआरडीजी) विभाग के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रोसपिनिंग (Electrospinning) नामक एक विधि इजाद की है. इसके द्वारा तैयार बैंडेज में लोहे के एक ऑक्साइड से बने नैनोपार्टिकल्स, Fe3O4, और एक बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर जिसे पॉलीकप्रोलैक्टोन (PCL) कहा जाता है को एक सर्जिकल टेप पर चिपकाया जाता है जिससे स्किन कैंसर से बचाव संभव होगा.



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