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Breaking News- ZEE EXCLUSIVE: राहुल की दोस्त ने खोला मर्डर का राज, बताया उस दिन का खौफनाक हाल

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नई दिल्ली: कितनी उम्मीदें थीं. एक साथ ज़िंदगी जीने का सपना था. लेकिन इन खुशियों को मजहबी कट्टरता वाली सोच ने ग्रहण लगा दिया.

टयूशन के बहाने ले जाकर मारा
दिल्ली के आदर्शनगर में रहने वाले राहुल राजपूत (Rahul Rajput) को कुछ लड़के टयूशन की बात कहकर घर से बुलाकर ले गए. राहुल के साथ उसकी दोस्त भी थी. वहां पर राहुल का पीट-पीटकर बेदर्दी के साथ मर्डर कर दिया गया. आखिर क्यों राहुल अपनी जान के दुश्मनों से मिलने गया था. राहुल की दोस्त ने अब इस पूरे रहस्य से पर्दा उठाया है. 

कजिन ने लड़की को फोन किया
राहुल की दोस्त: 6 बजे के करीब मेरे कजिन का मेरे नंबर पर फोन आया. वो कहता है राहुल का नंबर नहीं लग रहा है. मैंने उसे बताया कि उसकी मम्मी ने उसका फोन बेच दिया है. उसके पास नंबर नहीं है. वो कहता है कि कोई दूसरा नंबर है तो दे दे. मैंने राहुल की चाची का नंबर उसे दे दिया. इसके 2 मिनट के अंदर चाची के नंबर पर कॉल आती है. राहुल उससे अच्छे से बात करता है. कजिन उससे कहता है कि भाई 5 मिनट के लिए मिलना है. ट्यूशन के बारे में बात करनी है. इसके बाद कॉल कट ती है.

लड़की के कहने पर राहुल घर से बाहर निकला
राहुल की दोस्त: राहुल मुझसे पूछता है कि चलना है या नहीं. मैंने बोला कि 5 मिनट की बात है, चल लेते हैं. फिर बाहर निकलकर राहुल के कहने पर मैंने कजिन को कॉल किया. कजिन कहता है कि 5 मिनट के लिए वो मिल लेगा. हम पहुंचते हैं, उसके 5 मिनट बाद वो आता है और राहुल को मारना शुरू कर देता है. मैंने राहुल को बचाने की काफी कोशिश की लेकिन बचा नहीं पाई.  बचाने की बहुत कोशिश करती हूं. 

जान का खतरा देख लड़की को नारी निकेतन में भेजा गया
राहुल की दोस्त को फिलहाल नारी निकेतन में रखा गया है. उसे आदर्शनगर थाने के एसएचओ ने बताया है कि उसकी जान को घरवालों से खतरा है.

राहुल की दोस्त: एसएचओ ने मुझे कहा है कि वे मुझे मार देंगे.मार दें मुझे, अब फर्क नहीं पड़ता. मुझे राहुल चाहिए बस. उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी दी है. 

परिवार में पसर गया जिंदगी भर का मातम
एक परिवार में मातम है और एक दोस्त की आंखों में आंसू हैं. इन आंसूओं का हिसाब तो होना ही चाहिए. राहुल की मौत नहीं हुई, उसकी हत्या की गई है. उसे इतना पीटा गया कि उसकी जान चली गई. लेकिन इस दुखद कहानी में कई और सवाल छिपे हैं. राहुल राजपूत की मौत एक ऐसा सवाल है जिस पर पूरे देश को सोचने की जरूरत है. 

मजहबी कट्टरता ने ले ली राहुल की जान
हाथ किसी के भी हों लेकिन 18 साल के राहुल को धार्मिक कट्टरता की सोच ने मारा है. इस कट्टर सोच को कुचलना राष्ट्र प्रेम है. लेकिन इस मामले में पुलिसवालों पर भी उंगली उठ रही है. राहुल की दोस्त की जुबानी आपको ये भी सुनाते हैं कि कैसे अगर कुछ पुलिसवाले अपनी ड्यूटी नहीं भूलते तो राहुल शायद आज जिंदा होता. 

पुलिसवाले फर्ज नहीं भूलते तो बच जाता राहुल
राहुल की 7 अक्टूबर को बेरहमी से पिटाई की गई. राहुल की दोस्त के सामने उसके भाई और साथी राहुल को बुरी तरह पीटते हैं. राहुल की दोस्त का कहना है कि राहुल के पेट में पहले से ही दर्द रहता था और राहुल को उसी जगह बार-बार चोट पहुंचाई गई.

राहुल की दोस्त: राहुल को ट्यूशन के बहाने बुलाकर बहुत मारा. मैंने उनसे कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है, उसे मत मारो. लेकिन वे उसे मारते रहे. उसके पेट में पहले से ही दर्द रहता था. वहीं पर उसे बेदर्दी के साथ मारा गया. 

पुलिस ने नहीं की लड़की मदद
राहुल की दोस्त चीखती-चिल्लाती रही. लेकिन मदद को कोई आगे नहीं आया. वो अपने भाई और उसके दोस्तों से राहुल को छोड़ देने की मिन्नतें करती रहीं. लेकिन उन्हें तरस नहीं आया. वो भागी-भागी पास की पुलिस चौकी में भी पहुंची लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली.

राहुल की दोस्त: जिस गली में वारदात हुई उसके पास ही छोटा सा पुलिस स्टेशन (पुलिस चौकी) है. लेकिन वहां किसी ने हेल्प नहीं की. पुलिसवालों ने कहा कि अगर लड़ाई हो रही है तो हम क्या करें. मैं ने कहा कि चलो राहुल को मार रहे हैं. लेकिन वहां किसी ने उसकी बात नहीं सुनी. 

आरोपी पुलिसवालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सवाल ये है कि आदर्शनगर थाने में वो कौन पुलिसवाले थे. जिन्होंने अपना फर्ज नहीं निभाया. क्या पुलिस मुस्तैद होती तो 18 साल के राहुल की जान बच जाती. राहुल की मदद न करने वाले पुलिसवाले कौन हैं. ड्यूटी ना निभाने वाले पुलिसवालों पर  कार्रवाई क्यों नहीं हुई. वारदात में 8 आरोपी हैं तो फिर 5 की गिरफ्तारी क्यों हुई. क्या पुलिस मामले में लीपापोती करना चाहती है. 

पुलिस ने बाकी 3 आरोपियों को क्यों नहीं पकड़ा
राहुल की दोस्त इससे भी बड़ा और गंभीर आरोप लगा रही है. उसका दावा है कि राहुल की मौत के मामले में पुलिस ने अब तक सिर्फ 5 आरोपियों को पकड़ा है. जबकि वारदात में 8 लोग शामिल थे.

राहुल की दोस्त: मैंने सुना है कि 5 पकड़े गए हैं. पांच क्यों पकड़े गए हैं, जब वे 8 थे. उनमें से 5 आरोपी तो 8 तारीख को ही पकड़े गए थे. वो तीन क्यों नहीं पकड़े गए. क्या कर रही है पुलिस.

राहुल की दोस्त: मुझे नाम नहीं पता है. एक का लुक पता है, लुक बताया है मैंने पुलिस को. वो क्यों नहीं पकड़ा गया है. कजिन ने उसका नाम लिया. लेकिन मुझे याद नहीं.### बार-बार उसका नाम कहता है. एक बार बता 
दिया कहां रहता है. फिर क्यों नहीं पकड़ा गया उसे.

क्या समुदाय विशेष की लड़की से दोस्ती की सजा मौत है? 
परिवार का आरोप है कि राहुल की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि उसने दूसरे धर्म की लड़की से दोस्ती की थी. सवाल ये है कि IAS बनने का सपना देखने वाले राहुल राजपूत की हत्या क्या मजहबी कट्टरता के लिए की गई. क्या 
मुस्लिम लड़की से दोस्ती की सजा मौत होती है. ये सवाल सिर्फ पीड़ित परिवार नहीं पूरा हिंदुस्तान पूछ रहा है.

दादी रोते हुए बोल रही है – मेरा लाडला बेटा उन लोगों ने छीन लिया. राहुल राजपूत की बुआ कहती हैं कि वह इतना अच्छा लड़का था कि कभी किसी से बुरा नहीं बोलता था. किसी से लड़ाई नहीं करता था. राहुल राजपूत की मां कहती
 हैं कि लड़की ने जानबूझकर पिटवाया है मेरे बेटे को. उसी लड़की ने बेटे को मरवाया है. 

राहुल राजपूत को हिंदू होने की सज़ा मिली ?
राहुल राजपूत सिर्फ 18 साल का था. उसकी आंखों में भविष्य के कई सपने पल रहे थे, लेकिन पल भर में उसके सपने को ग्रहण लग गया. चंद मिनटों में दिल्ली में रहने वाला एक परिवार उजड़ गया. मज़हबी कट्टरता ने उनके
 जिगर के टुकड़े को छीन लिया.   
 
आदर्शनगर की मूलचंद कॉलोनी में रहता था राहुल राजपूत
राहुल राजपूत दिल्ली के आदर्श नगर की मूलचंद कॉलोनी में परिवार के साथ रहता था. उसकी 7 अक्टूबर को पीट पीटकर हत्या कर दी गई. परिवार का आरोप है कि राहुल ने एक लड़की से दोस्ती करने की कीमत चुकाई. लड़की 
मुस्लिम थी और राहुल हिंदू था. यही बात लड़की के परिवारवालों को खटक रही थी. लड़की के भाई और उसके साथियों ने  7 अक्टूबर को बहाना बनाकर राहुल को बुलाया और सरेआम पीट-पीट कर मार डाला.

राहुल के पिता  संजय राजपूत ने कहा कि उसे जानबूझकर टारगेट किया गया. यहां से फोन करके बुलाया है लड़कों ने. अब बच्चे को क्या पता था. उसे तो लग रहा था कि ट्यूशन पढ़ाने जाना है तो वो चला गया. वे उसे गली में लेकर चले गए और वहां उसकी पिटाई की.

राहुल के सपनों पर ‘कट्टरता’ का ग्रहण ?
राहुल बीए सेकेंड ईयर का छात्र था. वो पढ़ने में तेज़ और होनहार था. राहुल लोगों के घरों में ट्यूशन भी पढ़ाता था. लेकिन मुस्लिम लड़की से दोस्ती राहुल की मौत की वजह बन गई.

परिवार वालों का आरोप है कि घटना वाले दिन पुलिस ने केस दर्ज करने में भी आनाकानी की. बाद में पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया. पुलिस ने इस मामले में लड़की के भाई मोहम्मद राज हसन और मनवार हसन को गिरफ्तार किया है.पुलिस ने 3 नाबालिगों को भी पकड़ा है, जिसमें 2 आरोपी लड़की के मामा के बेटे हैं.

दोनों में अफेयर था, इसलिए मर्डर कर दिया गया : दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के अधिकारी संजय का कहना है कि क्या आपको इस मामले में कोई षडयंत्र दिख रहा है.  इसमें षडयंत्र क्या है. दोनों के बीच अफेयर था, इसीलिए मर्डर कर दिया गया. दिल्ली पुलिस ये मानने को तैयार नहीं है कि ये मर्डर एक सोची समझी साज़िश है, लेकिन बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का दावा है कि राहुल राजपूत की 
हत्या के पीछे एक षडयंत्र है.

दिल्ली में हिंदू होने की सजा कई लोगों ने जान देकर चुकाई : कपिल मिश्रा
कपिल मिश्रा कहते हैं कि ये वैसा ही हत्याकांड है. जैसा दिल्ली में त्यागी जी, अंकित सक्सेना जी के साथ हुआ था. वे कहते हैं कि पिछले 3 सालों में दिल्ली में हिंदू होने की कीमत कुछ लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है.  वे कहते हैं कि अक्टूबर 2018 में दिल्ली में 31 साल के हिंदू टीचर अंकित गर्ग की हत्या कर दी गई. फरवरी 2018 में दिल्ली में मुस्लिम लड़की से दोस्ती रखने पर लड़की के परिवारवालों ने 23 साल के अंकित सक्सेना की हत्या कर दी. बेटी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर मई 2019 में दिल्ली में ध्रुव त्यागी की हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप दूसरे धर्म के लोगों पर था । 

कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने हिंदुओं की हत्या पर साधी चुप्पी
दलित और मुस्लिम के नाम पर विरोध प्रदर्शन की राजनीति करने वाली कांग्रेस और दूसरे दलों ने दिल्ली की इन घटनाओं पर चुप्पी साध ली थी. अब राहुल राजपूत की मौत पर आम आदमी पार्टी के विधायक राहुल राजपूत के घर पहुंच गए और दिल्ली सरकार ने मुआवजे का ऐलान कर दिया, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल या फिर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी दिल्ली में होने के बावजूद आदर्श नगर तक नहीं पहुंच सके.

राहुल की हत्या पर शाहीनबाग लॉबी और मौमबत्ती गैंग हुआ गायब
राहुल राजपूत की हत्या से यह भी सवाल उठ रहा है कि अब शाहीनबाग लॉबी कहां है ? उसकी हत्या पर  ‘मोमबत्ती गैंग’ कहां है ? ‘सेक्युलर’ होने की सजा ‘हिंदुओं’ को कब तक मिलेगी ? क्या राहुल राजपूत के लिए विपक्ष नहीं करेगा धरना-प्रदर्शन ?

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