Jashpur News – जशपुरिहा महुआ सैनेटाइजर मधुकम उतरा बाजार में

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Publish Date: | Sat, 23 May 2020 04:05 AM (IST)

जशपुरनगर ( MyBagichaप्रतिनिधि)। महुआ अब कोरोना संक्रमण के खतरे के साथ अब बेरोजगारी के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनने जा रहा है। ड्रग विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किए जाने के बाद शुक्रवार को महुआ से सेैनिटाइजर निर्माण की विधिवत शुरूआत की गई। इस हर्बल सैनिटाइजर निर्माण की जिम्मेदारी सिनगीदैई महिला स्व सहायता समूह को दिया गया है। इस पूरे उपक्रम से फिलहाल सौ महिलाओं को रोजगार मिलने का दावा वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। सैनिटाइजर उत्पादन की प्रक्रिया में शेष रह जाने वाले अवशिष्टों से जैविक उर्वरक और पशु आहार निर्माण के लिए शोध कार्य शुरू कर दिया गया है। आने वाले दिनों में इसके शुरू हो जाने से महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक स्वालंबन का नया अध्याय शुरू हो जाएगा।

शहर के नजदीक स्थित रियासतकालिन पर्यटन स्थल पनची में वन विभाग के वनऔषधि उत्पाद केन्द्र में आयोजित एक सादे समारोह में विधायक विनय भगत, कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर, एसपी एसएल बघेल और डीएफओ एसके जाधव की उपस्थिति में इसकी शुरूआत की गई। कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने बताया कि जशपुर में उत्पादित महुआ सैनेटाइजर को मधुकम नाम से बाजार में उतारा जा रहा है। इसके 60 मिली पैक की कीमत 30 रूपए रखी गई है। जबकि आमतौर पर इस तरह के उत्पादों की कीमत बाजार में 50 रूपए तक होती है। पूरी तरह से हर्बल सैनिटाइजर कोरोना से चल रही जंग में तो तेजी आएगी ही,साथ ही महिलाओं की आत्मनिर्भरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

महुआ से सैनिटाइजर निर्माण की कमान सम्हार रही सिनगी सेना के कार्यकर्ताओं ने बताया कि फिलहाल वे सैनिटाइजर निर्माण के लिए बाजार से 40 रूपए प्रति किलो रूपए की दर से महुआ की खरीदी कर रही है। इस महुआ में रानू और गुड़ मिलाकर 8 से 10 दिन तक गलाया जाता है। पूरी तरह से गल जाने के बाद इसका वाष्पीकरण कर एथेनॉल प्राप्त किया जाता है। इस पूरे परियोजना की जिम्मेदारी सम्हाल रहे समर्थ जैन ने बताया कि इस तरीके से महुआ से अधिकतम 40 से 50 प्रतिशत तक एथेनॉल प्राप्त किया जाता है। लेकिन विशेष विधि से इसे परिष्कृत कर 80 से 90 प्रतिशत तक एथेनॉल प्राप्त किया जा रहा है। उन्होनें बताया कि सैनिटाइजर पूरी तरह से हर्बल है। ड्रग विभाग के लाइसेंस के शर्त के मुताबिक हाइड्रोजन पैरॉक्साइड के अतिरिक्त कोई भी रसायन उपयोग नहीं किया गया है।

पहाड़ी कोरवाओं को भी मिलेगा रोजगार

महुआ हर्बल सैनिटाइजर के निर्माण प्रक्रिया से परोक्ष रूप से जिले की विशेष संरक्षत जनजाति पहाड़ कोरवा को भी लाभ मिलेगा। दरअसल महुआ को गलाने में उपयोग किया जा रहा रानू को तैयार करने में इस जनजाति को महारत होती है। रानू वन्य जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है। इसमें महुआ को गलाने की विशेष क्षमता होती है।

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Posted By: MyBagichaNews Network

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