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Jashpur News – रेशम के सुनहरे धागों ने दिलाई सांसद आदर्श ग्राम जोरंडाझरिया को विकास की नई राह

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Publish Date: | Tue, 13 Oct 2020 06:50 PM (IST)

जशपुरनगर ( MyBagichaन्यूज)। जशपुर जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर दूर फरसाबहार विकासखण्ड में ग्राम पंचायत जोरंडाझरिया है। यहाँ वर्ष 2009-10 में रेशम विभाग ने विभागीय मद से करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में अर्जुन पौधरोपण की आधारशिला रखी थी, जिसे साल 2012-13 में मनरेगा से 9 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में विस्तारित किया गया। अब यहां लगभग 2 लाख 41 हजार अर्जुन के हरे-भरे पेड़ हरियाली बिखेर रहे हैं।

जिले के रेशम विभाग के सहायक संचालक मनीष पवार बताते हैं कि इस गांव में मनरेगा से कराए गए अर्जुन पौधरोपण नर्सरी और संधारण कार्य में 161 मनरेगा श्रमिकों को 7183 मानव दिवस का सीधा रोजगार मिला है, जिसके लिए उन्हें कुल 9 लाख 48196 रुपए का मजदूरी भुगतान किया गया है। इस दरम्यान लगभग 10 से 12 श्रमिकों के द्वारा कोसाफल उत्पादन से रोजगार के संबंध में अपनी रुचि दिखाई। इनकी रुचि और इच्छाशक्ति को देखते हुए विभाग ने इनका एक समूह बनाया और फिर इन्हें कुशल कीटपालन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कृमिपालन के लिए टसर कीट के रोगमुक्त अण्डे भी निःशुल्क दिए गए।

श्री पवार ने बताया कि इस समूह के द्वारा वर्ष 2016-17 में पहली बार एक लाख 38926 टसर कोकून का उत्पादन किया गया और उससे एक लाख 10214 रुपये की आय अर्जित की गई। पहले मनरेगा से मजदूरी और उसके बाद कोसाफल उत्पादन के रूप में सहायक रोजगार ने समूह के सदस्यों को इस कार्य में उत्साही बना दिया है। समूह ने साल 2016-17 से 2019-20 तक कुल 2 लाख 75454 कोसा फलों का उत्पादन कर दो लाख 87848 रुपयों की आमदनी प्राप्त की। यह आय उन्हें मजदूरी के रूप में विभाग के द्वारा स्थापित कोकून बैंक के माध्यम से प्राप्त हुई। जोरंडाझरिया में हुए इस टसर पौधरोपण ने हरियाली से विकास की एक नई दास्तां लिख दी है। इसके साथ ही गांव का 59 हेक्टेयर क्षेत्र संरक्षित होकर अब दूर से ही हरा-भरा नजर आता है। भौगोलिक नक्शे में भले ही जशपुर जिले का ग्राम जोरंडाझरिया का नाम छोटे अक्षरों में दर्ज किया जाता हो, लेकिन हरियाली से रोजगार के मुद्दे पर यह गांव जल्द ही विकास के नक्शे में उभर कर सामने आने वाला है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस गांव की सफलता की कहानी में गांव में टसर खाद्य पौधरोपण एवं कोसाफल उत्पादन से आदिवासी परिवारों को रोजगार देने का कार्य हो रहा है। करीब एक दशक पहले इस गांव में रेशम विभाग ने विभागीय मद से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 2 लाख 5 हजार अर्जुन पौधे टसर खाद्य पौधरोपण के अंतर्गत रोपे थे, जिसे 2012-13 में अतिरिक्त 9 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तारित किया गया। विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत यहाँ लगभग 11 लाख 36 हजार रुपयों की लागत से अतिरिक्त 36900 अर्जुन पौधों का रोपण मनरेगा से किया गया। वक्त बदलने के साथ-साथ इस परियोजना ने एक नया मोड़ लिया। आज ये पौधे 7 से 10 फुट के पेड़ बन चुके हैं। यहां 12 मनरेगा श्रमिकों के द्वारा रेशम विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त कर, एक प्रशिक्षित कीटपालक समूह के रुप में टसर कोकून का उत्पादन कर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है। पिछले चार सालों में इन्हें कोसाफल उत्पादन से लगभग पौने तीन लाख रुपये से अधिक की आमदनी हुई है। वे अब इसे सहायक रोजगार के रुप में अपनाकर खुश हैं।

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Posted By: MyBagichaNews Network

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