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Jashpur News – विवादराजनीति और कार्रवाई के बाद भी पूरा नहीं हो पाया जशपुर सन्नाा पहुंच मार्ग

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Publish Date: | Fri, 23 Oct 2020 03:45 PM (IST)

जशपुरनगर ( MyBagichaप्रतिनिधि)। जिले में सड़क को लेकर इन दिनों राजनीति गरमाई हुई है। निर्माणाधीन दमेरा चराईडांड़ मार्ग को लेकर इन दिनों कांग्रेस और भाजपा आमने सामने हैं। इस सियासत के बीच जशपुर से सन्नाा पहुंच मार्ग भी एक बार फिर विवादों में आने लगा है। 52 किलोमीटर लंबी यह सड़क पिछले 5 साल से अधूरा पड़ा हुआ है। लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए तैयार किए गए ड्राइंग डिजाइन और प्रस्ताव में तकनीकी गड़बड़ी की वजह से 52 किलोमीटर लंबी इस सड़क के बीच का 9 किलोमीटर हिस्सा अब भी क्षतिग्रस्त है। भाजपा अब इसे कांग्रेस के 2 साल के कार्यकाल की नाकामी बताते हुए निशाना साध रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्ण कुमार राय ने दमेरा चराईडांड़ मार्ग के निर्माण कार्य में अड़गा लगाए जाने पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस से सवाल पूछा था कि दो साल में क्यों नहीं विधायक ने इस सड़क निर्माण को पूरा करने के लिए पहल की है। उल्लेखनीय है कि जशपुर सन्नाा पहुंच मार्ग के लिए छत्तीसगढ़ की तात्कालिन भाजपा सरकार ने वर्ष 2015 में 17 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया था। निविदा प्रक्रिया के तहत हर्ष कंस्ट्रक्शन कंपनी को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही यह सड़क विवादों में घिर गई थी। सड़क निर्माण में हुई गड़बड़ी पर प्रदेश के तात्कालिन लोकनिर्माण मंत्री राजेश मूणत ने जशपुर प्रवास के दौरान विभाग के आला अधिकारियों को फटकार लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था। निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग के तात्कालिन ईई सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ सीटी कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन भी किया था।

आधे घंटे में तय कीजिए नौ किलोमीटर की दूरी

जशपुर से सन्नाा की दूरी महज 52 किलोमीटर की है। लेकिन इस दूरी को तय करने में लोगों का काफी परेशानी होती है। हर्राडीपा से लेकर सन्नाा के बीच तकरीबन 9 किलोमीटर की यह सड़क प्रदेश सरकार के 17 करोड़ रुपये खर्च कर दिए जाने के बावजूद अधूरा पड़ा हुआ है। इस सड़क के चौड़ीकरण और नवीनीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग दो बार प्रस्ताव बना कर प्रदेश सरकार को भेज चुकी है। लेकिन दोनों ही बार सरकार ने प्रस्ताव को बैरंग लौटा दिया है। वर्ष 2016 में पहाड़ी कोरवा लंबू राम की भूख से हुई कथित मौत की घटना के बाद पंड्रापाठ पहुंचे तात्कालिन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के सामने भी सन्नाा के इस विवादित सड़क का मामला उठा था। इस पर उन्होनें अधूरे सड़क का निर्माण पूरा करने के लिए अलग से बजट देने की घोषणा की थी।

पहाड़ी कोरवा क्षेत्र को जोड़ती है सड़क

विवादस्पद जशपुर सन्नाा पहुंच मार्ग प्रदेश के सबसे बड़े पहाड़ी कोरवा आवासीय क्षेत्र को बारहमासी पक्की सड़क से जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सड़क सन्नाा,पंड्रापाठ जैसे शतप्रतिशत पहाड़ी कोरवा आबादी वाले गांवों को जिला मुख्यालय से सीधा जोड़ती है। दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद पिछले 7 साल से पहाड़ी कोरवाओं को लेकर हो रहे सियासी घमासान मचा हुआ है। कोरवा समाज के अध्यक्ष और संरक्षक का मुद्दा वर्ष 2017 में राष्ट्रपति भवन तक पहुंची चुकी है। जाहिर है,आने वाले दिनों में इस सड़क के एक बार भी राजनीति विवाद का केन्द्र बनने की संभावना बनी हुई है।

वर्जन

जशपुर सन्नाा सड़क के अधूरे हिस्से का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री सहित लोकनिर्माण विभाग के आला अधिकारियों से चर्चा हुई है। अगले बजट में इसके शामिल होने की संभावना है।

– विनय कुमार भगत,विधायक जशपुर।

Posted By: MyBagichaNews Network

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