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Raipur News

News – कमाई के रोटी

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एक गांव म भूतानंद नाव के बामहन राहय। वोहा तीर-तखार म बड़े पंडित अउ गियानी के नाव ले परसिद्ध रहिस। अइसे-तइसे करके पचीस-तीस गांव म वोकर जजमानी राहय। अरोस-परोस म कथा, पूजा-पाठ, परवचन करे के जिम्मा वोकरे रहय।
एक समे एक गांव म भागवत परवचन करे बर अइस। परवचन नौ दिन ले सरलग चलिस। गांव म परवचन सुने खातिर नौ दिन ले चमचम ले तिहार मानिस। आज महराज के बिदाई के दिन हे। तइयारी म परमुख सियान, लइका, जवान सबो भिडग़े। आखिर दिन ये कहिके महराज के दरसन अउ आसीरवाद ले खातिर जम्मो गांव के मनखेमन चांटी बरोबर आगू-पीछू ओरियागे। चरन पखारत आसीरवाद लेत अपनआप ल धन-धन मनावत हें। दान सरूप चढ़ोतरी म का पूछे, बोरा-बोरा धान, रुपिया-पइसा बस देखत मन भरे के लइक। फेर, महराज पुन आतमा निकलिस। चढ़ोतरी के रुपिया-पइसा ले गांव म मंदिर बनाय के बिचार रखिस। अइसन बिचार सुनके गांव वालेमन हामी भरिन। महराज ल गली घुमावत जय-जयकार करिन।
गांव के सबले बड़े सेठ धनीराम आखिरी दिन हे कहिके महराज तीर छप्पन परकार के भोग के नेवता दे बर आइस। उही समे फोकटू राम गरीबहा किसान घला महराज तीर रूखा-सुखा भोग के नेवता दे बर टपक गे। महराज दूनों के नेवता देख दुविधा म परगे। सोच-बिचार के दूनों के भोग ल अपन तीर मंगइस अउ मंतर पढ़ के खाय ल बइठिस। दूनों थारी ल एक-एक तीर रखिस त देखथे किसान के थारी म सुख्खा रोटी अउ चटनी रहय। सेठ घर के थारी म कतकोन परकार के मिठई, रोटी अउ साग रहय।
महराज किसान के लाय रूखा-सुखा भोजन ल जादा खाथे अउ सेठ घर के थारी के भोजन जस के तस माड़े रहय। जेन ल देखके सेठ दुखी हो जथे अउ नइ खाय के कारन पूछथे। महराज कहिथे- देखव दूनोंझन मोर जजमान अव। फेर जेकर जेसन करम हे वोसन वोकर रोटी म सुवाद हे। अइसे कहिके दूनों थारी के एक-एक ठन रोटी ल उठाथे अउ मुठा म चपकथे। किसान के लाय रोटी म दूध निकलत हे अउ सेठ के छप्पन भोग म लहू। ऐकर रहस्य ल महराज समझाथे कि सेठ के रोटी बेकार अउ बिन मेहनत के बने हे। गरीब के खून के बू हे। जबकि किसान के रोटी म मेहनत अउ परिसरम के सुवाद हे। काबर ये रोटी कमई के रोटी आय।



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