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News – कोरोना अपडेट: प्रदेश में अक्टूबर के 15 दिन में 428 मौतें, ऐसे समझे इन आकड़ों का खेल

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इस लापरवाही के लिए जिला प्रशासन, जिला सीएमएचओ और जिला नगर निगम जिम्मेदार हैं। क्योंकि इन्हें संयुक्त रूप से एकमत होकर आंकड़े राज्य कोरोना कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को रोजाना भेजने हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में अप्रैल, जुलाई, सितंबर तक की मौतों की जानकारियां जिलों ने भेजी हैं।

रायपुर. प्रदेश में कोरोना मृत्युदर 0.9 प्रतिशत पर जा पहुंची है, जो अब तक के सर्वाधिक स्तर पर है। आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल में राज्य में 15 अक्टूबर तक 1,385 जानें जा चुकी हैं। सर्वाधिक 680 मौतें सितंबर के 30 दिनों में हुई है। लेकिन अक्टूबर के 15 दिनों में 428 मरीजों ने दमतोड़ चुके हैं।

यानी औसतन हर दिन 28.5 मौतें हो रही हैं। यह सरकारी आंकड़ों का सच है। मगर, आधा-अधूरा है। ‘पत्रिका’ पड़ताल में पूरा सच सामने आया। जी हां, जब जिलों में मौतें ज्यादा हो रही थीं तो जिले के जिम्मेदारों ने राज्य को कम-कम मौतों की रिपोर्ट भेजी। अब जब मौतों के आंकड़े कम हो रहे हैं तो पुरानी मौतों की सूचनाएं धीरे-धीरे जारी की जा रही हैं।

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रोजाना 28 मौतें नहीं हो रही हैं। दरअसल, बैक डेट में हुई मौतों को आज होने वाली मौतों के साथ जोड़ा जा रहा है। अक्टूबर में एक भी दिन 24 घंटे में 16 से अधिक मौतें नहीं हुईं। 6 दिन तो आंकड़ा दहाई के पार नहीं गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े आज के समय में लोगों के अंदर भय पैदा करने वाले हैं, तब जब कोरोना संक्रमण घटता दिख रहा है।

इस लापरवाही के लिए जिला प्रशासन, जिला सीएमएचओ और जिला नगर निगम जिम्मेदार हैं। क्योंकि इन्हें संयुक्त रूप से एकमत होकर आंकड़े राज्य कोरोना कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को रोजाना भेजने हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में अप्रैल, जुलाई, सितंबर तक की मौतों की जानकारियां जिलों ने भेजी हैं। जबकि कोरोना से मौत की पुष्टि में होने में 24 घंटे से अधिक समय नहीं लगता, तब जब मृतक कोरोना संदिग्ध हो। संक्रमित मरीज की रिपोर्ट २ घंटे में बन जाती है।

जिले जहां 50 से अधिक जानें गईं

रायपुर- 508, दुर्ग- 169, रायगढ़- 99, बिलासपुर- 85, जांजगीर-चांपा- 70, बलौदाबाजार- 55, राजनांदगांव- 54

‘विलंब से आई सूचना’ क्यों लिखना पड़ रहा

‘पत्रिका’ ने 24 सितंबर को इस गड़बड़ी को उजागर किया, जिसके बाद अब तक रोजाना पिछले मौतों की डेटा धीरे-धीरे कर जिले जारी करते आ रहे हैं। मगर, बड़ा सवाल यह है कि एक दिन में ही सारी बैक डेट में हुई मौतों की जानकारी क्यों नहीं जारी कर दी जाती, ताकी ‘विलंब से आई सूचना’ लिखने की जरुरत ही न पड़े। स्थिति तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी अपने ही सीएमएचओ पर समय पर मौत की सूचनाएं देने का दबाव तक नहीं बना पा रहे हैं।

जिलों से ही मौत की जानकारियां समय पर नहीं आ रहीं तो राज्य को कैसे मालूम चलेगा किसकी मौत हुई। इसलिए विलंब के साथ सूचना प्राप्त हुई, मुझे लिखना पड़ता है।
-डॉ. सुभाष पांडेय, प्रवक्ता एवं संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य विभाग

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