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News – चाइना से सामान मंगाने में 50% तक टैक्स, इसलिए मेक इन इंडिया पर जोर

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आयात शुल्क 23 फीसदी, प्रदेश में चाइना से 20 हजार करोड़ का व्यापार घटकर 20 से 30 फीसदी पर पहुंचा

रायपुर. त्योहारी सीजन में चाइना से इलेक्ट्रिानिक्स, इलेक्ट्रिकल, खिलौने, फैंसी आयटम्स, फर्नीचर, एलईडी, साउंड सिस्टम, मोबाइल एसेसरीज आदि मंगाना अब कारोबारियों के लिए महंगा सौदा पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति में आयात शुल्क 13 से बढ़कर 23 फीसदी तक जा पहुंचा हैं, वहीं मुंबई, दिल्ली, कोलकाता बंदरगाह में सामान उतारने के बाद 18 फीसदी जीएसटी मिलाकर टैक्स 41 फीसदी आ रहा है। इसके साथ ही शहरों तक पहुंचने में ट्रांसपोर्टिंग मिलाकर कुल 45 से 50 फीसदी टैक्स का भुगतान करना पड़ रहा है। ऐसे हालातों में अब राजधानी व प्रदेश के बड़े आयातकों ने दिल्ली, मुंबई के देशी उत्पादों पर भरोसा जताया है। ये देशी उत्पाद चाइना के मुकाबले थोड़े महंगे हैं, लेकिन गुणवत्ता में बेहतर हैं। साथ ही 23 फीसदी आयात शुल्क से भी बचत हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में हर साल चाइनीज उत्पादों का बाजार 20 हजार करोड़ के करीब रहता है, लेकिन कोविड-19 के बाद यह बाजार 70 से 80 फीसदी कम हो चुका है।

ग्राहक पूछ रहे कहीं चाइना का तो नहीं

राजधानी के बाजारों की यह स्थिति है कि अब कई ग्राहक बाजार में सामान खरीदते समय चाइनीज प्रोडेक्ट के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। मेक इन इंडिया पर ग्राहकों को कारोबारियों द्वारा जानकारी दी जा रही है। हालांकि बाजार में कई ऐसे भी उत्पाद हैं, जिसके मेक इन इंडिया या मेक इन चाइना को पहचानना अभी भी टेढ़ी खीर साबित हो रही है। ग्राहक ऐसे सामानों से ही दूरी बना रहे हैं।

फैंसी लाइट, खिलौने व कई आयात ठप

कैट के प्रदेशाध्यक्ष अमर परवानी ने बताया कि बीते वर्ष के मुकाबले चाइना से फैंसी लाइट, खिलौने, फैंसी आयटम्स और कई उत्पादों का आयात घट चुका है। इस त्यौहारी सीजन में बाजार में कई देशी उत्पादों से ग्राहक रू-ब-रू होंगे, जिसमें गांव से बने गोबर के दिए और कई सामान शामिल रहेेंगे। बीते कुछ महीनों में देश के भीतर मैन्युफेक्चरिंग यूनिट भी बढ़ी है।

देशी उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं

रविभवन व्यापारी संघ के अध्यक्ष जय नानवानी के मुताबिक दिल्ली, मुंबई आदि शहरों से सामान मंगाने में 18 फीसदी जीएसटी और ट्रांसपोर्टिंग मिलाकर अधिकतम 25 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है, वहीं चाइना से माल मंगाने में 45 से 50 फीसदी टैक्स आ रहा है। कागजी कार्यवाही भी बढ़ चुकी है। राजधानी के बाजारों में इस त्यौहारी सीजन में देशी उत्पाद देखने को मिलेगा।



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