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News – नये कृषि कानून के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी छत्तीसगढ़ सरकार

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केंद्र का कानून आने के बाद पूंजीपति ही कृषि उपज के मूल्य को कंट्रोल करेंगे। इस कानून के कारण छत्तीसगढ़ की दो महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित होंगी, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार इस कानून को लागू नहीं करेगी। चौबे ने कहा, हमको किसानों के लिए नया कानून बनाना पड़े तो बनाएंगे।

रायपुर. केंद्र सरकार के कृषि संबंधी तीनों कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने इस बात के संकेत दिए हैं। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री ने बुधवार को कहा, केंद्र सरकार द्वारा पारित काले कानून को लेकर विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।

रविंद्र चौबे ने कहा, केंद्र का कानून आने के बाद पूंजीपति ही कृषि उपज के मूल्य को कंट्रोल करेंगे। इस कानून के कारण छत्तीसगढ़ की दो महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित होंगी, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार इस कानून को लागू नहीं करेगी। चौबे ने कहा, हमको किसानों के लिए नया कानून बनाना पड़े तो बनाएंगे।

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हम इस काले कानून के विरोध में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस पर कानूनी सलाह लेकर कोर्ट भी जाएंगे। कृषि मंत्री ने कहा, हम संविधान तोडऩे जैसी बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम अपना कानून ला सकते हैं। इसे कोई नहीं रोक सकता।

गृह मंत्री बोले-विभागीय मंत्री को मिली है मसौदा बनाने की जिम्मेदारी

प्रदेश के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विभागीय मंत्री को अफसरों से चर्चा कर नये कानून का मसौदा तैयार करने को कहा है। हम कानून बनाएंगे। जरूरत पड़ी तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इसे पारित कराएंगे। किसानों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

भाजपा नेताओं को घेरेंगे किसान

छत्तीसगढ़ के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों का समर्थन करने वाले नेताओं का घेराव करने का फैसला किया है। किसान मजदूर महासंघ की ओर से बुधवार दोपहर रायपुर में बुलाई गई बैठक में इसका फैसला हुआ। महासंघ संयोजक मण्डल के तेजराम विद्रोही ने बताया, सभी संगठनों ने चरणबद्घ आंदोलन का फैसला किया है। इसकी शुरुआत दो अक्टूबर को आजाद चौक स्थित गांधी प्रतिमा के सामने उपवास से होगी। वहां से सभी लोग राजभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे।

3 से 13 अक्टूबर तक गांव-गांव में किसाों के साथ बैठक होगी। इसमें केंद्र सरकार के तीनों कानूनों के दुष्प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। विद्रोही ने बताया, 14 अक्टूबर को रायपुर सांसद सुनील सोनी को घेराव करने का फैसला हुआ है। उसके बाद एक-एक कर सभी भाजपा सांसदों और दूसरे वरिष्ठ नेताओं का घेराव कर पूछा जाएगा कि इन कानूनों के लागू होने के बाद क्या वे न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत नहीं मिलने की गारंटी दे रहे हैं।

बैठक में पारसनाथ साहू, मोतीलाल सिन्हा, द्वारिका साहू, जागेश्वर चंद्राकर, गिरधर मंढरिया, गौतम बंद्योपाध्याय, डॉ. संकेत ठाकुर, आलोक शुक्ला, रामगुलाम सिंह, मदन साहू, नवाब शेख, गोविंद चंद्राकर आदि शामिल थे।

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