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News – पांच साल से लगातार नोटिस भेजने के बाद भी शहर में संचालित हो रहीं अवैध पटाखा दुकानें

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– शहर से बाहर भेजने के लिए नहीं जा रहा लाइसेंस को रिन्यूअल।
– इस बार भी नोटिस- नोटिस में बीत जाएगी दीपावली।

रायपुर. कोरोना संक्रमणकाल के दौरान पटाखों के जरिए दीपावली में शहर में प्रदूषण बढ़ेगा, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और कोरोना संक्रमित के लिए घातक है। यह कहना है शहर के जानकारों का। वर्तमान में शहर में 164 पटाखा दुकानें अवैध रूप से व्यापार संचालित हो रही हैं। गणेश पूजा से इन दुकानों से पटाखों की ख्खरीदी बिक्री शुरू भ्हो गई है। जबकि, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सभी दुकानों को शहर के बाहर स्थापित करना है, लेकिन संचालकों द्वारा इसको लेकर किसी प्रकार का कार्य नहीं किया जा रहा। सभी अपनी दुकानों का संचालन कर रहे हैं।

हर साल दुर्गा पूजा से दीपावली तक पटाख्खा दुकान संचालकों को व्यापार की मौखिक अनुमति दे दी जाती है। लाइसेंस रिन्यूअल नहीं करने से न तो शासन को आय प्राप्त हो रही है न ही हाइकोर्ट के निर्देशानुसार जिला प्रशासन दुकानों को बाहर कर पा रहे हैं। दुकानों को शहर के बाहर करने के लिए संचालकों को पिछले पांच साल से प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा जा रहा है, लेकिन संचालक इस मामले में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि शहर में 175 पटाखा दुकाने में से 19 दुकान संचालकों का लाइसेंस रिन्यूअल किया गया है, बांकी अवैध रूप से संचालित हो रही है इसलिए दुकानें हटाने के आदेश पांच साल पहले मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावाद में पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन ने शहर के करीब 175 स्थाई पटाखा का कारोबार करने वाले दुकानदारों को शहर के बाहर शिफ्ट करने के लिए नोटिस भेजा गया था।

फायर सिस्टम भी नहीं
राजधानी में बिना लाइसेंस के दुकानें चल रही है। इतना ही नहीं, 90 फीसदी दुकानों में फायर सिस्टम भी नहीं है। यानी जिन नियमों का पालन करते हुए दुकानें खोली जानी थी, उन नियमों का पालन नहीं किया गया है। इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

फैक्ट फाइल

175 कुल दुकानें
19 लाइसेंस के संचालित हो रही दुकानों की संख्या

164 बिना लाइसेंस
-त्योहारी सीजनों में पटाख दुकानों को अस्थाई लाइसेंस दिया जाता है। साथ ही इन दुकानों के लिए प्रशासन जगह का भी निर्धारण करता है। उस समय दो-तीन दिन से लेकर एक सप्ताह तक दुकानदार अपनी दुकान का संचालन करता है।

-पहले 24 दिसंबर 2015 तक दुकानें शिफ्ट करने की बात कही गई, लेकिन कारोबारियों ने दबाव बनाया तो शिफ्टिंग की मियाद बढ़ाकर 15 मार्च 2016 कर दी गई थी। अब बिना लाइसेंस के ही राजधानी की पटाखा दुकानें संचालित हो रही हैं।

स्टॉक का मूल्यांकन नहीं
राजधानी के लाइसेंसधारी स्थाई पटाखा कारोबारियों को 400 किलोग्राम तक पटाखा रखने की अनुमति रहती है। अब बिना लाइसेंस के ही दुकान संचालकों द्वारा इससे ज्यादा स्टॉक जमा कर लिया गया है।

इतनी बार हो चुकी कवायद

– तत्कालीन कलक्टर ठाकुर राम सिंह के आदेशानुसार सभी कारोबारियों के पास 24 नवंबर 2015 तक का लाइसेंस था और उनके नवीनीकरण पर रोक लगाने को कहा गया था। जिसके बाद फिर से मार्च 2016 तक की अवधि बढ़ा दी गई थी।
– कलेक्टर रहते हुए ओपी चौधरी ने सभी पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस रिन्यूअल पर रोक लगा दी थी।

– दुकानदारों ने हाईकोर्ट में अपील करके फैसले को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी 11 अप्रैल 2018 को अपना फैसला सुनाते हुए शहर से दुकानों को बाहर करने का निर्देश जारी किया था।
– इसके बाद फिर कलेक्टर बसव राजू एस. ने सभ्भी पटाखा व्यापारियों को नोटिस जारी की, जिनमें से 11 ने शर्तों को मानने का शपथ पत्र दिया और फिर उनका लाइसेंस
रिन्यूअल कर दिया गया।

– इसके बाद से अब तक किसी का लाइसेंस रिन्यूअल नहीं हुआ।

इस मामले में एसडीएम के माध्यम से सभ्भी को नोटिस जारी कर निर्देश को पूरा करने संबंध में जानकारी मांगी जाएगी। इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉ.एस. भारतीदासन, कलेक्टर, रायपुर











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