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News – फसलों को कीट प्रकोप से बचाने खुले मौसम में कीटनाशकों का करें छिड़काव

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कृषि विभाग ने दी किसानों को सलाह

बलौदा बाजार। वर्तमान में जिले के अधिकांश क्षेत्रों में धान की फसल में माहो, फुदका, चितरी बंकी, पत्ती मोड़ आदि कीटों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी कृषकों द्वारा निरन्तर रूप से की जा रही है। लगातार बदलते मौसम व सही दवाई का प्रयोग नहीं करने से समस्या और भी विकट होते जा रही है। ऐसी अवस्था में जिले के कृषि विभाग द्वारा बताई गई दवाईयों का उपयोग करके आसान तरीके से कीटों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
उप संचालक कृषि मोनेश साहू ने बताया कि माहो, फुदका जैसे रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए डीनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी का 80.100 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ (जो कि बाजार में ओसीन, टोकन, सेनपाई, सिम्बोला आदि नामों से प्रचलित हैं) अथवा पायमट्रोजीन 50 फीसदी डब्ल्यूपी का 100 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ (जो कि चेस, सिमडा) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 40 से प्रतिशत से ज्यादा, इथीप्रोल 40 प्रतिशत, डब्ल्यूजी (जो कि बाजार में ग्लेमोर नाम से प्रचलित है) का 50.60 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। छिड़काव खुले मौसम में दोपहर 2 बजे के बाद करें। खेतों से अधिक पानी निकाल देें। पत्ती मोड़ व तनाछेदक के नियंत्रण के लिए फिफ्रोनिल 5 प्रतिशत एससी 300.350 मिली लीटर प्रति एकड़ (प्रचलित नाम भीम, रिजेन्टए फिपरो) अथवा कन्टाफ हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एससी का 300-400 ग्राम प्रति एकड़ (प्रचलित नाम कार्बो 50, करंट क्रांंति 50 कार्गो) अथवा क्लोरेन्ड्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत जीआर दानेदार का 4 किग्रा प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। यह दवाई बाजार में फरटेरा नाम से प्रचलित है। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने कृषि विस्तार अधिकारी से जानकारी प्राप्त कर सकतें हैं।



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