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News – राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के 10 हजार करोड़ के टेंडर निरस्त किए

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राज्य सरकार (State Government) 10 हजार करोड़ की जल जीवन मिशन परियोजना (Jal Jeevan Mission) के सभी टेंडरों को रद्द कर दिया है।

रायपुर. राज्य सरकार (State Government) 10 हजार करोड़ की जल जीवन मिशन परियोजना (Jal Jeevan Mission) के सभी टेंडरों को रद्द कर दिया है। इस टेंडर प्रक्रिया में देशभर के करीब 1300 ठेकेदारों ने हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। अब केंद्र सरकार के निर्देशानुसार फिर से टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। बताया जाता है कि पीएचई मंत्री गुरु रुद्रकुमार इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। हालांकि इसे लेकर मंत्री की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई हैं।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि सभी घरों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। छत्तीसगढ़ के भी 38.34 लाख घरों में पाइपलाइन के जरिए पानी की आपूर्ति की जानी थी। इस काम में करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया था। प्रक्रिया विवादों में पड़ने के बाद इसे रद्द कर दिया गया है।

जांच कमेटी की रिपोर्ट पर फैसला
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल मुख्य सचिव आरपी मंडल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। सोमवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में इस रिपोर्ट को रखा गया। रिपोर्ट के आधार पर ही टेंडर निरस्त करने का फैसला हुआ।

यह है मामला
मुख्यमंत्री के पास टेंडर प्रक्रिया में नियम व शतों का पालन नहीं करने और आपत्र लोगों को टेंडर दिए जाने की शिकायत पहुंची थी। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। शिकायत में आरोप था. टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतते हुए इस योजना में 70 प्रतिशत (7हजार करोड़) का कम बाहरी 10 ठेकेदारों को दिया गया है। वहीं सी श्रेणी ठेकेदारों को पात्रता के विपरीत करोड़ों का काम दिया गया है।

जल जीवन मिशन योजना में सात हजार करोड़ केंद्र से मिले हैं। इस राशि का बंदरबांट चल रहा है। हर कोई अपने हिस्से के लिए लड़ रहा है पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार के पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। – रमन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री

अब आगे यह
टेंडर निरस्त होने के बाद सभी प्रक्रिया फिर से दोहरानी होगी। वहीं जानकारों का कहना है कि दोबरा प्रक्रिया शुरू होने पर कार्यों की लागत बढ़ सकती है। इसका आर्थिक नुकसान राज्य सरकार को उठाना पड़ सकता है। वहीं समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर राशि लैप्स होने का खतरा भी रहेगा।






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