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News – रायपुर जिले में कोरोना से 139 दिनों में हुई 505 मौतें

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सबसे ज्यादा सितंबर में 278 कोरोना संक्रमितों ने जान गंवाई

रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ-साथ मरने वालों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, रायपुर में अक्टूबर में कोरोना संक्रमित मरीजों के मिलने तथा मरने वालों की संख्या पर कुछ हद तक जरूर अंकुश लगा है। रायपुर जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के मौत का आंकड़ा 500 के पार पहुंच गया है। मंगलवार को मरने वालों की संख्या 499 थी, जो बुधवार को 505 पहुंच गई।
सबसे ज्यादा सितंबर में 278 कोरोना संक्रमितों ने जान गंवाई है। 18 मार्च को प्रदेश का पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज रायपुर के समता कॉलोनी में मिली थी। इसके करीब 72 दिनों बाद कोरोना से पहली मौत 29 मई को बिरगांव के मैटल पार्क वार्ड क्रमांक-10 निवासी 35 वर्षीय निरंजन कुमार सिंह की हुई थी। उरला के एक निजी फैक्ट्री में काम करने वाले निरंजन को सर्दी, खांसी, बुखार और निमोनिया की शिकायत पर 27 मई को राजधानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना वायरस के लक्षण दिखने पर सैंपल जांच के लिए एम्स भेजा गया। एम्स से रिपोर्ट आने से पहले उसकी मौत हो गई। वह मूलत: झारखंड राज्य के जिला पलामू के ग्राम बीरघर का रहने वाला था। 4 साल पहले वह रायपुर आया था। रायपुर में पहली मौत के साथ कोरोना संक्रमित मरीजों के मिलने के साथ-साथ मौत का ग्राफ भी बढ़ता चला गया। वर्तमान में रोजाना कोराना संक्रमितों की मौत दर्ज की जा रही है।
बीमारी वालों को सबसे ज्यादा खतरा
हार्ट, लिवर, किडनी, कैंसर, शुगर, बीपी और इनके अतिरिक्त अन्य बीमारियों (को-मोर्बिडिटी) से ग्रसित लोगों के लिए कोरोना काफी खतरनाक साबित हुआ है। इसे मौत के आंकड़ों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। कोरोना से रायपुर में अब तक हुई मौतों में को-मोर्बिडिटी वाले 370 से ज्यादा हैं।
जांच क्षमता बढ़ाकर लगाया अंकुश
रायपुर में विगत 15 दिनों से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आई है। मौत का आंकड़ा भी कुछ कम हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि वर्तमान में एम्स, आंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल, शहरी व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समेत 29 केंद्रों पर कोरोना की नि:शुल्क जांच की जा रही है। कोरोना के शुरूआती दौर में जहां 200-400 सैंपल जांच होते थे, वर्तमान में 3 हजार से अधिक सैंपल की जांच हो रही है। रैपिड एंटीजन किट, आरटी-पीसीआर और ट्रू-नॉट से कोरोना की जांच हो रही है।

कम गंभीर और बिना लक्षणों वाले मरीजों को को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है, जहां तुरंत इलाज मिल रहा है। अब एकमात्र लक्ष्य मौत की दर को कम करना है।
डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ, रायपुर



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