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News – 18 गम्भीर मरीजों की होम आइसोलेशन में मौत, सभी कैंसर, किडनी और हार्ट के रोगी

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प्रदेश में 20 अक्टूबर तक 1,65,279 मरीजों ने कोरोना को मात दी

रायपुर. प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार में नियंत्रण, अस्पतालों में बेड कम पडऩे की समस्या का समाधान और साधन-संस्थान, मैन पावर की कमी को बहुत हद तक होम आइसोलेशन के विकल्प ने हल कर दिया। प्रदेश में 20 अक्टूबर तक 1,65,279 मरीजों ने कोरोना को मात दी, जिनमें से 68,189 प्रतिशत मरीज होम आइसोलेशन में रहते हुए ठीक हुए। मगर, इस विकल्प को 18 मरीजों और उनके परिजनों की लापरवाही ने सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। होम आइसोलेशन की सुविधा को चुनने वाले 18 कोरोना संक्रमित मरीजों की इस कोरोना काल में मौत हुई है। यह खुलासा स्टेट कोरोना डेथ ऑडिट टीम की रिपोर्ट में हुआ है। मरने वालों में संक्रमित होने से पूर्व से कैंसर, किडनी, लिवर और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीज थे।

परिजनों ने जिला प्रशासन से होम आइसोलेशन का विकल्प अंडर टेकिंग (सहमति-पत्र) देकर ले लिया। जबकि संबंधित एजेंसी जिला प्रशासन को यह अनुमति देनी ही नहीं चाहिए थी स्वास्थ्य विभाग की अवर मुख्य सचिव (एसीए) रेणु पिल्ले के सामने डेथ ऑडिट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सुभाष पांडेय ने प्रजेंटेशन दिया। सूत्र बताते हैं कि एसीएस नाराज हुईं। कहा कि जिलों को स्पष्ट तौर पर यह बता दिया जाए कि होम आइसोलेशन किन मरीजों के लिए है और नियम क्या हैं?

कई घरों में थर्मामीटर तक नहीं मिले

इन मौतों पर हुए डेथ ऑडिट के तौर विभागीय टीम ने पाया कि मृतक मरीज के घर में होम आइसोलेशन के लिए अनिवार्य बुखार नापने के लिए थर्मामीटर, पल्स और ऑक्सीजन नापने के लिए पल्स ऑक्सी मीटर, बीपी मशीन तक नहीं मिली।

होम आइसोलेशन इनके लिए नहीं

10 साल से कम उम्र के बच्चों और 50 साल से अधिक के बुजुर्गों, ऐसे व्यक्ति जो किसी भी अन्य बीमारी से ग्रसित हों और गर्भवतियों। इन्हें अस्पताल में ही भर्ती करवाया जाना है।



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